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शिशॠकी बà¥à¤¤à¥€ उमà¥à¤° के साथ-साथ उनके खान-पान पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना à¤à¥€ जरूरी है। वहीं, बचà¥à¤šà¥‡ सà¥à¤µà¤à¤¾à¤µ से चंचल होते हैं, जिस कारण खाने-पीने में आनाकानी करते हैं। जब à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कà¥à¤› खिलाने की कोशिश की जाà¤, तो वो à¤à¥‚ख न होने की बात कह कर खाने से बचते हैं। अगर शिशॠपेट à¤à¤° कर खाना नहीं खा रहा, तो इसके पीछे साधारण से लेकर कà¥à¤› गंà¤à¥€à¤° कारण हो सकते हैं। इन कारणों और इस समसà¥à¤¯à¤¾ से जà¥à¥œà¥‡ उपाय के बारे में आप मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ के इस लेख में पà¥à¥‡à¤‚गे। साथ ही, इस लेख में हम बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की à¤à¥‚ख बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के कà¥à¤› टिपà¥à¤¸ à¤à¥€ बताà¤à¤‚गे।
सबसे पहले यह समà¤à¤¤à¥‡ हैं कि बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¥‹à¤œà¤¨ करने से बचता कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को à¤à¥‚ख न लगना का मतलब कà¥à¤¯à¤¾ है?
à¤à¥‚ख न लगने का मतलब होता है कि बचà¥à¤šà¤¾ का अपनी मरà¥à¤œà¥€ से या किसी अनà¥à¤¯ कारण से परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में à¤à¥‹à¤œà¤¨ गà¥à¤°à¤¹à¤£ नहीं कर रहा है। इन अनà¥à¤¯ कारणों के बारे में आगे लेख में विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से बताया गया है। बचà¥à¤šà¥‡ के ठीक तरह से à¤à¥‹à¤œà¤¨ न करने से उसमें पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी होती है और विकास दर धीमी होने लगती है (1)। इस दौरान, कà¥à¤› मामलों में बचà¥à¤šà¥‡à¤‚ अपनी मरà¥à¤œà¥€ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° खाना पसंद करते हैं और मना कर देने पर कà¥à¤› à¤à¥€ खाने से इनकार करने लगते हैं।
दो से पांच साल तक के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को à¤à¥‚ख न लगना या कम लगना आम समसà¥à¤¯à¤¾ है। इस उमà¥à¤° के लगà¤à¤— 25 से 35 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को उनके माता-पिता पिकी ईटरà¥à¤¸ (खाने में नखरे करने वाले) कहते हैं। à¤à¤¸à¥‡ बचà¥à¤šà¥‡ खाना खाने से मना करने लगते हैं। फिर धीरे-धीरे बचà¥à¤šà¥‡ की खाने के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ रà¥à¤šà¤¿ कम होने लगती है और उसका कà¥à¤› à¤à¥€ खाने को मन नहीं करता (2)।
आइà¤, आगे आपको बताते हैं कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¥‚ख कम लगने के कà¥à¤¯à¤¾ कारण हो सकते हैं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को à¤à¥‚ख न लगने के कारण |
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को à¤à¥‚ख न लगना कोई बीमारी नहीं है, बलà¥à¤•ि यह अनà¥à¤¯ किसी बीमारी के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• है, जैसे :
पेट में कीड़े होना (3)
गलसà¥à¤† (ममà¥à¤ªà¥à¤¸) (4)
दांत आना (5)
शरीर में आयरन की कमी (6)
हेपेटाइटिस-ठका टीकाकरण (7)
à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ (8)
इन सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के अलावा, बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को à¤à¥‚ख न लगने के कà¥à¤› अनà¥à¤¯ कारण à¤à¥€ हो सकते हैं, जैसे (2) :
अगर माता-पिता खाने के लिठबचà¥à¤šà¥‡ पर दबाव डालते हैं, तो बचà¥à¤šà¤¾ खाने से मना कर सकता है।
पेय पदारà¥à¤¥ (जैसे दूध या जूस) या मीठे खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का अधिक सेवन से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की à¤à¥‚ख कम हो सकती है।
कई बार परिवार वालों के डर, धमकी, सजा के डर, जबरदसà¥à¤¤à¥€ खाना खिलाने के कारण à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की à¤à¥‚ख कम हो जाती है।
कई बचà¥à¤šà¥‡ दूसरों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ खींचने के लिठà¤à¥€ खाना नहीं खाते।
à¤à¤• उमà¥à¤° के बाद बचà¥à¤šà¥‡ अपनी पसंद की चीजें खाना पसंद करते हैं और माता-पिता के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° खाना पसंद नहीं करते।
कई बार बचà¥à¤šà¥‡ परिवार के सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की नकल उतारते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में अगर परिवार का कोई सदसà¥à¤¯ किसी विशेष आहार का सेवन नहीं करता है, तो बचà¥à¤šà¥‡ à¤à¥€ वह खाने से मना कर सकते हैं।
इस लेख के अगले à¤à¤¾à¤— में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¥‚ख की कमी के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के बारे में बताया जा रहा है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को à¤à¥‚ख न लगने के लकà¥à¤·à¤£
कà¥à¤› खास लकà¥à¤·à¤£ होते हैं, जिनसे यह पता लगाया जा सकता है कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¥‚ख की कमी हो रही है, जैसे (1):
à¤à¤• महीने तक à¤à¥‚ख की कमी।
खाना खतà¥à¤® करने में समय लगाना।
सà¥à¤µà¤¯à¤‚ खाना खाने से मना करना।
खाते समय नखरे करना या चिड़चिड़ाना (stressful mealtime)।
आधी रात को खाने की जिद करना।
अधिक समय तक सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ या बोतल से दूध पीने की जिद करना।
समय और उमà¥à¤° के साथ आहार की मातà¥à¤°à¤¾ का न बढ़ना।
आगे हम आपको यह बताने वाले हैं कि उमà¥à¤° के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° बचà¥à¤šà¥‡ की डाइट कितनी होनी चाहिà¤à¥¤
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठकितनी मातà¥à¤°à¤¾ में à¤à¥‹à¤œà¤¨ परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ है?
लगà¤à¤— छह महीने तक बचà¥à¤šà¤¾ सिरà¥à¤« मां के दूध का सेवन करता है। छह महीने के बाद बचà¥à¤šà¥‡ को ठोस आहार दिया जा सकता है। नीचे जानिठकि छह महीने से तीन साल तक के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठकितना आहार परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ है, इसे हमने उमà¥à¤° के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° तीन à¤à¤¾à¤— में बांटा है :
6 महीने से 12 महीने के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठआहार (9) (10)
à¤à¤• साल से दो साल के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठआहार (11)
दो साल से तीन साल के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठआहार (12)
अब तीन आयॠवरà¥à¤— में कà¥à¤¯à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ खाना चाहिठइसे हम नीचे दी गई टेबल के जरिठविसà¥à¤¤à¤¾à¤° से समà¤à¤¾ रहे हैं :
6 से 12 महीने के बचà¥à¤šà¥‡ 1 से 2 साल के बचà¥à¤šà¥‡ 2 से 3 साल के बचà¥à¤šà¥‡
कितना खिलाà¤à¤‚ आधा कप नरà¥à¤® आहार तीन चौथाई से à¤à¤• कप à¤à¤• चौथाई कप मांसाहारी से à¤à¤• कप शाकाहारी आहार
कà¥à¤¯à¤¾ खिलाà¤à¤‚ 6-8 महीने तक मेश किठहà¥à¤ केले, उबले हà¥à¤ मटर, गाजर, शकà¥à¤•रकंद, नाशपाती और मां के दूध या फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥à¤• के साथ सिरीअल
9 से 12 महीने तक उबली हà¥à¤ˆ सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, छिले हà¥à¤ फल, खिचड़ी शीरा, खीर व गà¥à¤°à¤¾à¤¹à¤® कà¥à¤°à¥‡à¤•रà¥à¤¸
दूध, अंडा, मीट, मछली चिकन
अनाज जैसे चने, दाल या मटर
नटà¥à¤¸, हरी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ और फल
à¤à¤• सà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¸ का टà¥à¤•ड़ा, 1 कप रेडी-टू-ईट सिरीअल या à¤à¤• कप पके हà¥à¤ चावल, पका हà¥à¤† पासà¥à¤¤à¤¾, या पका हà¥à¤† सिरीअल
हरी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ जैसे पतà¥à¤¤à¤¾à¤—ोà¤à¥€, फूलगोà¤à¥€, केल
फल जैसे संतरा, सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤¬à¥‡à¤°à¥€ व टमाटर आदि
दही व चीज़ आदि
à¤à¤• अंडा, मीट, मछली, चिकन
कब खिलाà¤à¤‚ दिन के दो ठोस आहार के बीच में तीन से चार बार थोड़ा-थोड़ा सà¥à¤¨à¥ˆà¤•à¥à¤¸ दें। दिन के दो ठोस आहार के बीच में तीन से चार बार थोड़ा-थोड़ा सà¥à¤¨à¥ˆà¤•à¥à¤¸ दे सकते हैं। दिन में तीन से चार बार
लेख के अगले à¤à¤¾à¤— में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की à¤à¥‚ख बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के मेडिकल टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट के बारे में बताया है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की à¤à¥‚ख बढ़ाने के लिठइलाज
कई बार बचà¥à¤šà¥‡ को à¤à¥‚ख न लगने के पीछे का कारण कोई सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ हो सकती है। à¤à¤¸à¥‡ में उसकी à¤à¥‚ख बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठउस बीमारी का इलाज करवाना जरूरी है। वहीं, अगर उसे à¤à¥‚ख न लगने के पीछे कोई अनà¥à¤¯ कारण हैं, तो उसे दवाइयों की मदद से ठीक किया जा सकता है।
कई चिकितà¥à¤¸à¤• साइपà¥à¤°à¥‹à¤¹à¥‡à¤ªà¥à¤Ÿà¤¾à¤¡à¤¿à¤¨ (Cyproheptadine) नामक दवा लेने की सलाह देते हैं। माना जाता है कि यह दवा à¤à¥‚ख बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में मदद कर सकती है। साथ ही कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤¿à¤¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में बॉडी मास इंडेकà¥à¤¸ (BMI) बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में मदद कर सकती है (13)। हालांकि, कई सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€ में यह दवा जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कारगर साबित नहीं हà¥à¤ˆ है, इसलिठबेहतर है कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की à¤à¥‚ख बढ़ाने की दवा डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ परामरà¥à¤¶ के बिना न दें।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की à¤à¥‚ख बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठमाता-पिता घर में कà¥à¤› टिपà¥à¤¸ à¤à¥€ अपना सकते हैं, जिनके बारे में लेख के अगले à¤à¤¾à¤— में बताया गया है।
बचà¥à¤šà¥‡ की à¤à¥‚ख बढ़ाने के लिठटिपà¥à¤¸
बचà¥à¤šà¥‡ की à¤à¥‚ख बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठमाता-पिता नीचे बताई गई इन टिपà¥à¤¸ को अपना सकते हैं (1) (2) (14)।
जब बचà¥à¤šà¤¾ खाना खाठतो उससे टीवी, विडियो गेम, मोबाइल और धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ à¤à¤Ÿà¤•ाने वाले सामान दूर रखें।
बचà¥à¤šà¥‡ को हर चार घंटे में कà¥à¤› खिलाà¤à¤‚।
कोशिश करें कि बचà¥à¤šà¥‡ के खाने का समय (मीलटाइम) 20-30 मिनट से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ न हो, वरना बचà¥à¤šà¤¾ बोर होने लगेगा।
बचà¥à¤šà¥‡ को हर समय à¤à¤• ही तरह का खाना न खिलाà¤à¤‚। उसके खाने में विविधता लाने से उसकी खाने में रà¥à¤šà¤¿ बनी रहेगी।
अगर बचà¥à¤šà¤¾ खाने से मना कर रहा हो, तो जबरदसà¥à¤¤à¥€ खाना उसके मà¥à¤‚ह में न डालें।
जब बचà¥à¤šà¤¾ चमà¥à¤®à¤š पकड़ना सीख जाà¤, तो खाने के लिठउसे à¤à¤• अलग चमà¥à¤®à¤š दें और सà¥à¤µà¤¯à¤‚ खाने के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करें।
शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में ढेर सारा खाना न देकर, थोड़ा-थोड़ा खाना दें। जब बचà¥à¤šà¤¾ पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿ में रखा खाना खतà¥à¤® कर दे, तà¤à¥€ आप उसे और दे सकते हैं।
खाने के समय में सà¥à¤¨à¥ˆà¤•à¥à¤¸, जूस या अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में पीने के लिठदूध न दें। इन सà¤à¥€ के वजह से यह हो सकता है कि बचà¥à¤šà¤¾ खाना ठीक से न खाà¤à¥¤
दो समय के खाने में बीच में, जैसे लंच और डिनर के बीच में शाम को सà¥à¤¨à¥ˆà¤•à¥à¤¸ दे सकते हैं। इस बात का à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना जरूरी है कि उनकी मातà¥à¤°à¤¾ अधिक न हो।
यदि बचà¥à¤šà¤¾ खाना खाने में नखरे करे] तो उसे डराने धमकाने या सजा देने की जगह, उससे पà¥à¤¯à¤¾à¤° और धैरà¥à¤¯ के साथ वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° करें।
उसके खाने और सà¥à¤¨à¥ˆà¤•à¥à¤¸ का समय निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ करके à¤à¤• टाइमटेबल बना लें और उसी के आधार पर बचà¥à¤šà¥‡ को खाना दें। अगर वह हर समय कà¥à¤› न कà¥à¤› खाता रहेगा, तो सही खाने के समय उसकी à¤à¥‚ख खतà¥à¤® हो जाà¤à¤—ी और वह ठीक से à¤à¥‹à¤œà¤¨ नहीं करेगा।
कोशिश करें कि पूरा परिवार साथ बैठकर खाना खाà¤à¥¤ कई बार अकेले खाने से à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ का खाना खाने का मन नहीं करता।
खाने के ऊपर सॉस या उसकी मनपसंद चटनी से डिजाईन बना कर दे सकते हैं। इससे उनकी खाने में रà¥à¤šà¤¿ बà¥à¥‡à¤—ी।
बचà¥à¤šà¥‡ को फल और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को उबाल कर, उनकी पà¥à¤¯à¥‚री बना कर दी जा सकती है। इससे उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ खाने में आसानी होगी और वे उसे चाव से खा पाà¤à¤‚गे।
बचà¥à¤šà¥‡ को कितना खाना है, यह उस पर छोड़ दें। अगर वह खाना खतà¥à¤® नहीं करता है, तो उस पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दबाव न डालें।
खाने की टेबल पर उसने बातें करें। जब बचà¥à¤šà¤¾ बातें समà¤à¤¨à¥‡ लगे, तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपने बचपन के किसà¥à¤¸à¥‡ सà¥à¤¨à¤¾à¤à¤‚ और बताà¤à¤‚ कि आपको खाने में कà¥à¤¯à¤¾ पसंद था।
आप उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रंग-बिरंगी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ और फल के सॉस, जैसे – पराठे के साथ सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤¬à¥‡à¤°à¥€ या ऑरेंज सॉस दे सकते हैं। इनसे उनका खाने के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ आकरà¥à¤·à¤£ बà¥à¥‡à¤—ा।
बचà¥à¤šà¥‡ को रोज नाशà¥à¤¤à¤¾ करने की आदत डलवाà¤à¤‚। नाशà¥à¤¤à¤¾ न करने से बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¥‚खा और थका हà¥à¤† महसूस करेगा (15)।
सà¥à¤¨à¥ˆà¤•à¥à¤¸ में आप बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठडà¥à¤°à¤¾à¤ˆ फà¥à¤°à¥‚टà¥à¤¸ à¤à¥€ रख सकते हैं।
उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ खाना खाने के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करने के लिठबीच-बीच में टà¥à¤°à¥€à¤Ÿ जैसे चॉकलेट, आइसकà¥à¤°à¥€à¤® व कैंडी आदि दी जा सकती हैं, लेकिन इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रोजमरà¥à¤°à¤¾ के खाने में शामिल न करें।
बचà¥à¤šà¥‡ के लिठखाने को लेकर पूरा दिन पीछे न पड़ें। अगर बचà¥à¤šà¤¾ खाना न खाà¤, तो विकलà¥à¤ª के तौर पर उसे दूध न दें। साथ ही जब बचà¥à¤šà¥‡ को à¤à¥‚ख लगे, तो उसे किसी पà¥à¤°à¤•ार का पैकà¥à¤¡ फूड à¤à¥€ न दें।
डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ की मानें तो बचà¥à¤šà¥‡ के 2 साल कि उमà¥à¤° के बाद उसे सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराना बंद कर देना चाहिà¤à¥¤
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की à¤à¥‚ख बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठकà¥à¤› टिपà¥à¤¸ जानने के बाद, लेख के अगले à¤à¤¾à¤— में आपको बताते हैं कि कà¥à¤› घरेलू उपाय जो इस समसà¥à¤¯à¤¾ का समाधान करने में मदद कर सकते हैं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की à¤à¥‚ख बढ़ाने के 5 घरेलू उपाय | Baccho Ki Bhukh Badhane Ke Nuskhe In Hindi
आयरन यà¥à¤•à¥à¤¤ आहार : जैसा कि लेख में ऊपर बताया गया है कि आयरन की कमी के कारण à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¥‚ख की कमी हो सकती है। à¤à¤¸à¥‡ में आहार में आयरन यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को शामिल करने से फायदा हो सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में, बचà¥à¤šà¥‡ के आहार में आयरन के सà¥à¤°à¥‹à¤¤ जैसे पालक, साबà¥à¤¤ अनाज, पासà¥à¤¤à¤¾, चावल, मटर, चने व बà¥à¤°à¥‹à¤•ली आदि को शामिल किया जा सकता है (16)।
विटामिन-सी यà¥à¤•à¥à¤¤ आहार : जब आप बचà¥à¤šà¥‡ को आयरन यà¥à¤•à¥à¤¤ आहार दें, तो उसके साथ विटामिन-सी यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ देना à¤à¥€ जरूरी है। विटामिन-सी शरीर में आयरन को अवशोषित (absorption) करने में मदद करता है। विटामिन-सी के लिठटमाटर, संतरे, सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤¬à¥‡à¤°à¥€ आदि जैसे फल बचà¥à¤šà¥‡ को खिला सकते हैं (16)।
सोआ/डिल (Dill): यह à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार की हरà¥à¤¬ होती है, जो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के पेट से जà¥à¥œà¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं, जैसे – à¤à¥‚ख की कमी, गैस व अपच आदि से राहत दिलाने में मदद कर सकती है। इसे सूप में मिलाकर बचà¥à¤šà¥‡ को दिया जा सकता है। अनà¥à¤¯ हरà¥à¤¬à¥à¤¸ की तरह इसे मसालों में à¤à¥€ उपयोग किया जा सकता है (17)।
मीठे से बचें : बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मीठे खादà¥à¤¯ और पेय पदारà¥à¤¥ देने से बचें। ये बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की à¤à¥‚ख कम कर सकते हैं (10)।
लेख अगले à¤à¤¾à¤— में जानिठकि बचà¥à¤šà¥‡ को à¤à¥‚ख न लगने की समसà¥à¤¯à¤¾ के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° से मिलना कब जरूरी हो जाता है।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास कब जाà¤à¤‚?
नीचे बताई गई परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की à¤à¥‚ख को लेकर डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करें :
बचà¥à¤šà¥‡ का वजन घट रहा हो।
बचà¥à¤šà¥‡ का पिछले छह महीने से वजन न बà¥à¤¾ हो।
बचà¥à¤šà¥‡ को पेट दरà¥à¤¦ रहता हो।
बचà¥à¤šà¥‡ को बà¥à¤–ार रहता हो।
बचà¥à¤šà¤¾ कà¥à¤› à¤à¥€ खाने पर उलà¥à¤Ÿà¥€ कर रहा हो।
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